ASHTA NEWS : आष्टा में श्रीमद् भागवत कथा का पांचवां दिवस गुरुदेव गोविंद जाने ने दिया श्रद्धा और सद्गुणों का संदेश

ASHTA NEWS : आष्टा श्रीमद् भागवत कथा पांचवां दिवस 2026: गुरुदेव गोविंद जाने का अमृत वचन, श्रद्धा प्रेम और सद्गुणों का संदेश. अहंकार त्याग, सात्विक जीवन और संस्कारों पर जोर – पूरी डिटेल्स यहाँ

मध्य प्रदेश के आष्टा नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस पर सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कथा व्यास गोविंद जाने गुरुदेव ने अपने अमृत वचनों से श्रद्धालुओं को जीवन में प्रेम सद्गुण और संस्कार अपनाने का संदेश दिया.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुरुदेव ने अहंकार मोह और लालच को जीवन का दुश्मन बताया और सच्चे सनातनी बनने की प्रेरणा दी.

गुरुदेव का मुख्य संदेश

गुरुदेव गोविंद जाने ने कथा में कहा कि मंदिर जाते समय शरीर रूपी घाट के बाहर क्रोध मोह और अहंकार छोड़कर जाएं. आपकी जानकारी के लिए बता दें अहंकार से बनी दोस्ती ज्यादा दिन नहीं टिकती जबकि प्रेमभाव से बनी मित्रता सदा बनी रहती है. जो व्यक्ति अहंकार त्यागता है वही सद्गुरु की दृष्टि में ऊंचा उठता है. जहां लालच और अहम बढ़ जाता है वहां सगा भाई भी साथ छोड़ देता है. लालची व्यक्ति कभी परिवार का सगा नहीं बन सकता.

सच्चा सनातनी बनने की सीख

गुरुदेव ने आगे कहा कि जो हमें भगवान से दूर करता है और मंदिर जाने से रोकता है वह सगा नहीं हो सकता. आपकी जानकारी के लिए बता दें सच्चा मित्र वही है जो हमें अच्छे और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. सच्चा सनातनी वह है जो भीतर प्रेम भरोसा श्रद्धा और हरि नाम का दीपक जलाए.

सात्विक जीवन पर जोर

गुरुदेव ने सात्विक जीवन पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य को भगवान ने सात्विक भोजन के लिए बनाया है लेकिन वह मांसाहार की ओर दौड़ता है जबकि कई पशु ऐसे हैं जो कभी मांस ग्रहण नहीं करते. आपकी जानकारी के लिए बता दें यदि वे नहीं बदले तो हम क्यों बदल गए. बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए उन्हें आरती रामायण भजन और उच्च विचारों से जोड़ें.

धनवान कौन

गुरुदेव ने कहा कि जिसके पास व्रत चरित्र सत्कर्म और ईमान की पूंजी है वही सच्चा धनवान है. बेटियों को दहेज में भले कुछ न दें लेकिन सत्कर्म दिव्य संस्कार और शिक्षा अवश्य दें जिससे वह ससुराल का कायाकल्प कर सके.

निष्कर्ष

आष्टा में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस पर गुरुदेव गोविंद जाने ने श्रद्धा प्रेम और सद्गुणों का संदेश दिया. हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण कर धन्य हुए.

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